बगलामुखी यंत्र (Bagalamukhi Yantra) दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या, माता बगलामुखी का साक्षात स्वरूप माना जाता है। हिंदू धर्म और तंत्र शास्त्र में इन्हें 'पीताम्बरा' (पीले रंग से प्रेम करने वाली) और 'ब्रह्मास्त्र विद्या' भी कहा जाता है।
यह यंत्र पूरे ब्रह्मांड में शत्रु विनाश, वाद-विवाद में विजय और स्तंभन शक्ति (शत्रु की बुद्धि, वाणी और क्रियाओं को रोक देना) के लिए सबसे शक्तिशाली और अचूक माना जाता है। तांबे (Copper) पर बना बिना रंगों वाला शुद्ध बगलामुखी यंत्र गजब की सुरक्षात्मक ऊर्जा समेटे होता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं:
1. नाम का अर्थ और स्वरूप
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बगलामुखी का अर्थ: 'बगला' शब्द संस्कृत के 'वल्गा' से आया है, जिसका अर्थ होता है 'लगाम' या 'दुश्मन को वश में करने वाली'। माता बगलामुखी अपने भक्तों के शत्रुओं की जीभ पकड़कर उनकी बोलती बंद कर देती हैं।
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यंत्र की बनावट: तांबे के चौकोर पत्तर पर उकेरा गया यह यंत्र त्रिकोण, षट्कोण (Star) और विशेष रूप से माता बगलामुखी के दिव्य अक्षरों व अक्षत आकृतियों से मिलकर बनता है। बिना रंगों के भी, तांबे की धातु इसकी तीव्र और सुरक्षात्मक ऊर्जा को पूरी तरह से जाग्रत रखती है।
2. बगलामुखी यंत्र के मुख्य लाभ
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कोर्ट-कचहरी और मुकदमों में जीत: यदि आप किसी कानूनी विवाद, जमीन के झगड़े या झूठे कोर्ट केस में फंसे हैं, तो यह यंत्र आपको निश्चित विजय दिलाने की क्षमता रखता है।
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शत्रुओं का स्तंभन: यह यंत्र दुश्मनों के षड्यंत्रों, बुरी नजर और उनके बुरे इरादों को पूरी तरह 'फ्रीज' (स्तंभित) कर देता है। शत्रु आपके सामने चाहकर भी कुछ नहीं बोल पाते।
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वाद-विवाद और राजनीति में सफलता: जो लोग राजनीति, डिबेट, वकालत (Law) या किसी ऐसी फील्ड में हैं जहाँ अपनी बात मनवानी होती है, उनके लिए यह यंत्र वरदान समान है। यह वाक्-शक्ति और प्रभाव को बढ़ाता है।
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बुरी शक्तियों से महाकवच: यह यंत्र घर या व्यापार स्थल पर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे मारण, मोहन, उच्चाटन, जादू-टोना और नजर दोष का कोई असर नहीं होता।
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अचानक आने वाले संकटों से रक्षा: यह दुर्घटनाओं, अकाल मृत्यु और जीवन में अचानक आने वाले बड़े उतार-चढ़ावों से साधक की रक्षा करता है।

