1. स्वरूप और बनावट
तंबे पर बना बिना रंगों वाला शुद्ध तारा यंत्र ज्यामितीय (Geometrical) आकृतियों से बना होता है। इसमें मुख्य रूप से एक केंद्रीय बिंदु होता है, जो त्रिकोण (Triangle), अष्टदल कमल (8 Lotus Petals) और बाहरी भूपुर (स्क्वायर बाउंड्री) से घिरा होता है। यह बनावट ब्रह्मांड की दिव्य शक्तियों को एक जगह केंद्रित करती है।
2. तारा यंत्र के मुख्य लाभ
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घोर संकटों से मुक्ति: माता तारा को संकटहारिणी कहा जाता है। यदि कोई व्यक्ति जीवन के किसी बड़े संकट, गंभीर आर्थिक तंगी या कोर्ट-कचहरी के मामलों में फंसा हो, तो यह यंत्र उसे दलदल से बाहर निकालता है।
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वाकपटुता और बुद्धि (Communication & Wisdom): माता तारा का एक रूप 'नील सरस्वती' भी है। इसलिए, इस यंत्र की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि, रचनात्मकता और बात करने की कला (Speech) में गजब का सुधार होता है।
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आर्थिक समृद्धि और धन: यह यंत्र दरिद्रता को दूर करता है। व्यापार में घाटा हो रहा हो या नौकरी में रुकावट आ रही हो, तो इसकी स्थापना से धन के नए मार्ग खुलते हैं।
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बृहस्पति (Jupiter) दोष का निवारण: ज्योतिष में माता तारा का संबंध गुरु ग्रह से माना गया है। इस यंत्र की पूजा करने से कुंडली में कमजोर बृहस्पति मजबूत होता है और भाग्य का साथ मिलने लगता है।

